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mahabharat 1.53.4-6: उग्रश्रवाजी बोले - शौनकजी ! मैं आपको उन ऋषियों के नाम बता रहा हूँ जो उस समय राजा जनमेजय के सेवक और सदस्य थे । उस यज्ञ में वेद विद्वानों में श्रेष्ठ ब्राह्मण चण्ड भार्गव थे । वे च्यवन ऋषि के वंश में उत्पन्न हुए थे । वे उस समय के प्रसिद्ध कर्मकाण्डी थे । वे वृद्ध और विद्वान ब्राह्मण कौत्स उद्गाता, जैमिनी ब्रह्मा, शार्ंगरवा और पिंगल अध्वर्यु थे । 4-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.53: सर्पयज्ञके ऋत्विजोंकी नामावली, सर्पोंका भयंकर विनाश, तक्षकका इन्द्रकी शरणमें जाना तथा वासुकिका अपनी बहिनसे आस्तीकको यज्ञमें भेजनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 53: सर्पयज्ञके ऋत्विजोंकी नामावली, सर्पोंका भयंकर विनाश, तक्षकका इन्द्रकी शरणमें जाना तथा वासुकिका अपनी बहिनसे आस्तीकको यज्ञमें भेजनेके लिये कहना  »  श्लोक 4-6
 
 
श्लोक  1.53.4-6 
सौतिरुवाच
हन्त ते कथयिष्यामि नामानीह मनीषिणाम्।
ये ऋत्विज: सदस्याश्च तस्यासन् नृपतेस्तदा॥ ४॥
तत्र होता बभूवाथ ब्राह्मणश्चण्डभार्गव:।
च्यवनस्यान्वये ख्यातो जातो वेदविदां वर:॥ ५॥
उद्‍गाता ब्राह्मणो वृद्धो विद्वान् कौत्सोऽथ जैमिनि:।
ब्रह्माभवच्छार्ङ्गरवोऽथाध्वर्युश्चापि पिङ्गल:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - शौनकजी ! मैं आपको उन ऋषियों के नाम बता रहा हूँ जो उस समय राजा जनमेजय के सेवक और सदस्य थे । उस यज्ञ में वेद विद्वानों में श्रेष्ठ ब्राह्मण चण्ड भार्गव थे । वे च्यवन ऋषि के वंश में उत्पन्न हुए थे । वे उस समय के प्रसिद्ध कर्मकाण्डी थे । वे वृद्ध और विद्वान ब्राह्मण कौत्स उद्गाता, जैमिनी ब्रह्मा, शार्ंगरवा और पिंगल अध्वर्यु थे । 4-6॥
 
Ugrashravaji said – Shaunakji! I am telling you the names of those sages who were the servants and members of King Janamejaya at that time. In that yajna, the best Brahmin among the Veda scholars was Chand Bhargava. He was born in the lineage of sage Chyavan. He was a famous ritualist of that time. The old and learned Brahmins were Kautsa Udgata, Jaimini Brahma and Sharngarava and Pingal Adhvaryu. 4-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)