Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.52.7: कोई एक कोस, कोई चार कोस और कोई तो गाय के कान के बराबर ही लम्बे थे। हे अग्निहोत्रश्रेष्ठ शौनक! वे सभी छोटे-बड़े सर्प बड़े वेग से अग्नि में स्वाहा हो रहे थे। | mahabharat अध्याय 1.52: सर्पसत्रका आरम्भ और उसमें सर्पोंका विनाश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रोशयोजनमात्रा हि गोकर्णस्य प्रमाणत:।
पतन्त्यजस्रं वेगेन वह्नावग्निमतां वर॥ ७॥
अनुवाद
कोई एक कोस, कोई चार कोस और कोई तो गाय के कान के बराबर ही लम्बे थे। हे अग्निहोत्रश्रेष्ठ शौनक! वे सभी छोटे-बड़े सर्प बड़े वेग से अग्नि में स्वाहा हो रहे थे।
Some were one Kos long, some four Kos and some were only as long as a cow's ear. O best of the Agnihotris, Shaunak! All those snakes, big and small, were being sacrificed in the flames with great speed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥