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mahabharat 1.5.33: राक्षस! तत्पश्चात् महर्षि भृगु ने मुझे साक्षी मानकर वेदविहित विधिपूर्वक इसे ग्रहण किया॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.5.33 
अथेमां वेददृष्टेन कर्मणा विधिपूर्वकम्।
भार्यामृषिर्भृगु: प्राप मां पुरस्कृत्य दानव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राक्षस! तत्पश्चात् महर्षि भृगु ने मुझे साक्षी मानकर वेदविहित विधिपूर्वक इसे ग्रहण किया॥33॥
 
Demon! Thereafter, Maharishi Bhrigun, with me as his witness, formally adopted it through rituals as prescribed in the Vedas. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)