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mahabharat 1.5.31: अग्निदेव बोले - हे दानवपुत्र! इसमें संदेह नहीं कि तुमने ही सबसे पहले पुलोमा का वरण किया था, किन्तु तुमने विधिपूर्वक मंत्रोच्चार करते हुए उससे विवाह नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.5.31 
अग्निरुवाच
त्वया वृता पुलोमेयं पूर्वं दानवनन्दन।
किन्त्वियं विधिना पूर्वं मन्त्रवन्न वृता त्वया॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव बोले - हे दानवपुत्र! इसमें संदेह नहीं कि तुमने ही सबसे पहले पुलोमा का वरण किया था, किन्तु तुमने विधिपूर्वक मंत्रोच्चार करते हुए उससे विवाह नहीं किया।
 
Agnidev said - O son of Danava! There is no doubt that you were the one who chose Puloma first, but you did not marry her while chanting the prescribed mantras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)