Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.5.30: उग्रश्रवाजी कहते हैं - राक्षस की यह बात सुनकर सात ज्वालाओं वाले अग्निदेव अत्यन्त दुःखी हुए। एक ओर तो वे मिथ्यात्व से भयभीत थे और दूसरी ओर भृगु के शाप से भी; अतः वे धीरे से इस प्रकार बोले। | mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं - राक्षस की यह बात सुनकर सात ज्वालाओं वाले अग्निदेव अत्यन्त दुःखी हुए। एक ओर तो वे मिथ्यात्व से भयभीत थे और दूसरी ओर भृगु के शाप से भी; अतः वे धीरे से इस प्रकार बोले।
Ugrashravaji says - Hearing this from the demon, Agnidev who had seven tongues of flames became very sad. On one hand he was afraid of the lie and on the other hand he was afraid of Bhrigu's curse; therefore he spoke softly as follows. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥