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श्लोक 1.5.29  |
श्रुत्वा त्वत्तो भृगोर्भार्यां हरिष्याम्याश्रमादिमाम्।
जातवेद: पश्यतस्ते वद सत्यां गिरं मम॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| हे सर्वज्ञ अग्निदेव! आपके मुख से यह सब सुनकर मैं आपके सामने ही इस आश्रम से भृगु की पत्नी का हरण कर लूँगा; अतः आप मुझसे सत्य बात कहिए।॥29॥ |
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| 'O omniscient Agnidev! After listening to all this from your mouth, I will abduct Bhrigu's wife from this ashram right in front of you; therefore, tell me the truth.'॥ 29॥ |
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