vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत
»
श्लोक 27
श्लोक
1.5.27
त्वमग्ने सर्वभूतानामन्तश्चरसि नित्यदा।
साक्षिवत् पुण्यपापेषु सत्यं ब्रूहि कवे वच:॥ २७॥
अनुवाद
'अग्निदेव! आप सभी प्राणियों के भीतर सदैव निवास करते हैं। सर्वज्ञ अग्नि! आप पुण्य और पाप के साक्षी के समान रहते हैं; अतः मुझसे सत्य कहिए। 27॥
'Agnidev! You always reside within all living beings. Omniscient fire! You remain like a witness regarding virtue and sin; So tell me the truth. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×