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mahabharat 1.5.23: 'पावक! तुम देवताओं के स्वरूप हो। इसलिए जब मैं पूछूँ तो मुझे सच-सच बताना। मैंने ही सबसे पहले इस सुंदरी को अपनी पत्नी चुना था।'   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.5.23 
मुखं त्वमसि देवानां वद पावक पृच्छते।
मया हीयं वृता पूर्वं भार्यार्थे वरवर्णिनी॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'पावक! तुम देवताओं के स्वरूप हो। इसलिए जब मैं पूछूँ तो मुझे सच-सच बताना। मैंने ही सबसे पहले इस सुंदरी को अपनी पत्नी चुना था।'
 
'Pavak! You are the face of the gods. So tell me the truth when I ask. I was the first one to choose this beautiful lady as my wife.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)