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mahabharat 1.5.20: परन्तु बाद में उसके पिता ने शास्त्रविधि के अनुसार उसका विवाह महर्षि भृगु से कर दिया। भृगुनन्दन! अपने पिता का वह अपराध राक्षस के हृदय में सदैव काँटे की तरह चुभता रहा। 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.5.20 
तां तु प्रादात् पिता पश्चाद् भृगवे शास्त्रवत्तदा।
तस्य तत् किल्बिषं नित्यं हृदि वर्तति भार्गव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु बाद में उसके पिता ने शास्त्रविधि के अनुसार उसका विवाह महर्षि भृगु से कर दिया। भृगुनन्दन! अपने पिता का वह अपराध राक्षस के हृदय में सदैव काँटे की तरह चुभता रहा। 20॥
 
But later her father married her to Maharishi Bhrigu as per the scriptures. Bhrigunandan! That crime of his father always remained like a thorn in the heart of the demon. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)