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mahabharat 1.5.19: उस शुभ सती का हरण करने की इच्छा मन में रखकर वह अत्यन्त प्रसन्न हुआ और मन ही मन कहने लगा, ‘मेरा कार्य पूर्ण हो गया।’ शुद्ध और हँसमुख पुलोमा को पहले ही पुलोमा नामक राक्षस ने चुन लिया था॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.5.19 
जातमित्यब्रवीत् कार्यं जिहीर्षुर्मुदित: शुभाम्।
सा हि पूर्वं वृता तेन पुलोम्ना तु शुचिस्मिता॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस शुभ सती का हरण करने की इच्छा मन में रखकर वह अत्यन्त प्रसन्न हुआ और मन ही मन कहने लगा, ‘मेरा कार्य पूर्ण हो गया।’ शुद्ध और हँसमुख पुलोमा को पहले ही पुलोमा नामक राक्षस ने चुन लिया था॥19॥
 
Having in his mind the desire of abducting that auspicious Sati, he became very happy and said to himself, 'My task is accomplished.' The pure and smiling Puloma had earlier been chosen by the demon named Puloma.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)