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mahabharat 1.5.18: हे ब्रह्मन्! वह राक्षस काम से पीड़ित था। उस समय पुलोमा को वहाँ अकेला देखकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई, क्योंकि वह पुण्यात्मा पुलोमा का अपहरण करना चाहता था।   |   mahabharat अध्याय 1.5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.5.18 
तां तु रक्षस्तदा ब्रह्मन् हृच्छयेनाभिपीडितम्।
दृष्ट्वा हृष्टमभूद् राजन् जिहीर्षुस्तामनिन्दिताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! वह राक्षस काम से पीड़ित था। उस समय पुलोमा को वहाँ अकेला देखकर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई, क्योंकि वह पुण्यात्मा पुलोमा का अपहरण करना चाहता था।
 
O Brahman! That demon was suffering from lust. At that time he felt very happy to see Puloma alone there, because he wanted to abduct the virtuous Puloma. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)