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श्लोक 1.5.13  |
सौतिरुवाच
भृगो: सुदयिता भार्या पुलोमेत्यभिविश्रुता।
तस्यां समभवद् गर्भो भृगुवीर्यसमुद्भव:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| उग्रश्रवाजी बोले - महामुने ! भृगु की पत्नी का नाम पुलोमा था । वह अपने पति को बहुत प्रिय थी । उसके उदर में भृगुजी के वीर्य से उत्पन्न गर्भ पल रहा था । 13॥ |
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| Ugrashravaji said – Mahamune! Bhrigu's wife's name was Puloma. She was very dear to her husband. The fetus born from Bhriguji's semen was growing in her stomach. 13॥ |
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