श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 5: भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.5.13 
सौतिरुवाच
भृगो: सुदयिता भार्या पुलोमेत्यभिविश्रुता।
तस्यां समभवद् गर्भो भृगुवीर्यसमुद्भव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - महामुने ! भृगु की पत्नी का नाम पुलोमा था । वह अपने पति को बहुत प्रिय थी । उसके उदर में भृगुजी के वीर्य से उत्पन्न गर्भ पल रहा था । 13॥
 
Ugrashravaji said – Mahamune! Bhrigu's wife's name was Puloma. She was very dear to her husband. The fetus born from Bhriguji's semen was growing in her stomach. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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