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श्लोक 1.5.12  |
शौनक उवाच
सूतपुत्र यथा तस्य भार्गवस्य महात्मन:।
च्यवनत्वं परिख्यातं तन्ममाचक्ष्व पृच्छत:॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| शौनकजी बोले - हे सारथिपुत्र! मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि महात्मा भार्गव का नाम च्यवन कैसे प्रसिद्ध हुआ? कृपया मुझे यह बताइए॥ 12॥ |
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| Shaunakji said - O son of a charioteer! I am asking you how the name of Mahatma Bhargava became famous as Chyavan? Please tell me this.॥ 12॥ |
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