Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.9: उसका पराक्रम अद्वितीय था। धनवान होकर वह देवी वसुधा का पालन करता था। संसार में उससे द्वेष करनेवाला कोई नहीं था और वह भी किसी से द्वेष नहीं करता था॥9॥ | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ररक्ष पृथिवीं देवीं श्रीमानतुलविक्रम:।
द्वेष्टारस्तस्य नैवासन् स च द्वेष्टि न कंचन॥ ९॥
अनुवाद
उसका पराक्रम अद्वितीय था। धनवान होकर वह देवी वसुधा का पालन करता था। संसार में उससे द्वेष करनेवाला कोई नहीं था और वह भी किसी से द्वेष नहीं करता था॥9॥
His valour was unmatched. Being wealthy, he looked after this goddess Vasudha. There was no one in the world who hated him and he too did not hate anyone.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥