Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.49.8: चारों वर्णों को अपने-अपने धर्म में प्रतिष्ठित करके उन्होंने धर्मपूर्वक उनकी रक्षा की। राजा परीक्षित केवल धर्म के ज्ञाता ही नहीं, अपितु धर्म के साक्षात् स्वरूप थे॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.49.8 
चातुर्वर्ण्यं स्वधर्मस्थं स कृत्वा पर्यरक्षत।
धर्मतो धर्मविद् राजा धर्मो विग्रहवानिव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
चारों वर्णों को अपने-अपने धर्म में प्रतिष्ठित करके उन्होंने धर्मपूर्वक उनकी रक्षा की। राजा परीक्षित केवल धर्म के ज्ञाता ही नहीं, अपितु धर्म के साक्षात् स्वरूप थे॥8॥
 
Having established all the four Varnas in their respective Dharmas, he protected them in a righteous manner. King Parikshit was not only a knower of Dharma, he was the very embodiment of Dharma.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)