Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.49.5: उग्रश्रवाजी कहते हैं - राजा के सभी मंत्री धर्म के ज्ञाता और बुद्धिमान थे। जब महाबली राजा जनमेजय ने उनसे यह पूछा, तब उन सबने इस प्रकार उत्तर दिया ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.49.5 
सौतिरुवाच
मन्त्रिणोऽथाब्रुवन् वाक्यं पृष्टास्तेन महात्मना।
सर्वे धर्मविद: प्राज्ञा राजानं जनमेजयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - राजा के सभी मंत्री धर्म के ज्ञाता और बुद्धिमान थे। जब महाबली राजा जनमेजय ने उनसे यह पूछा, तब उन सबने इस प्रकार उत्तर दिया ॥5॥
 
Ugrasravaji says - All the ministers of the king were knowledgeable about Dharma and were intelligent. When the great king Janamejaya asked them this, they all replied to him as follows. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)