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mahabharat 1.49.4: आप सब लोगों से अपने पिता का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनकर ही मुझे शांति मिलेगी, अन्यथा मैं कभी भी शांत नहीं रह सकूँगा ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.49.4 
श्रुत्वा भवत्सकाशाद्धि पितुर्वृत्तमशेषत:।
कल्याणं प्रतिपत्स्यामि विपरीतं न जातुचित्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आप सब लोगों से अपने पिता का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनकर ही मुझे शांति मिलेगी, अन्यथा मैं कभी भी शांत नहीं रह सकूँगा ॥4॥
 
I will find peace only after hearing the entire story about my father from you all; otherwise I will never be able to remain calm. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)