Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.31: लेकिन बुद्धिमान ऋषि ने उसे इसके लिए कुछ भी भला-बुरा नहीं कहा। वह पहले की तरह शांत और स्थिर रहा, मरा हुआ साँप कंधे पर लिए, बिना किसी क्रोध के। | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चोवाच स मेधावी तमथो साध्वसाधु वा।
तस्थौ तथैव चाक्रुद्ध: सर्पं स्कन्धेन धारयन्॥ ३१॥
अनुवाद
लेकिन बुद्धिमान ऋषि ने उसे इसके लिए कुछ भी भला-बुरा नहीं कहा। वह पहले की तरह शांत और स्थिर रहा, मरा हुआ साँप कंधे पर लिए, बिना किसी क्रोध के।
But the wise sage did not say anything good or bad to him for this. He remained calm and composed as before, with the dead snake on his shoulder, without any anger.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि पारीक्षितीये एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें परीक्षित्-चरित्रविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥