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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.49.3 
जनमेजय उवाच
जानन्ति स्म भवन्तस्तद् यथा वृत्तं पितुर्मम।
आसीद् यथा स निधनं गत: काले महायशा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "आप जानते ही होंगे कि मेरे पिता का आचरण उनके जीवनकाल में कैसा था। और जब उनका अंत आया तो उस प्रतापी राजा की मृत्यु कैसे हुई?"
 
Janamejaya asked, "You must be knowing what my father's conduct was like during his lifetime. And how did that glorious king die when his end came?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)