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mahabharat 1.49.29: राजा को यह बात मालूम नहीं थी कि ऋषि ने मौन व्रत धारण कर रखा है; इसलिए तुम्हारे पिता ने क्रोध में भरकर उनका तिरस्कार किया।   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.49.29 
न बुबोध च तं राजा मौनव्रतधरं मुनिम्।
स तं क्रोधसमाविष्टो धर्षयामास ते पिता॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजा को यह बात मालूम नहीं थी कि ऋषि ने मौन व्रत धारण कर रखा है; इसलिए तुम्हारे पिता ने क्रोध में भरकर उनका तिरस्कार किया।
 
The king did not know that the sage had taken a vow of silence; therefore your father, filled with anger, despised him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)