Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.25: वह कमर में तलवार बाँधे पैदल चल रहा था। उसके पास बाणों से भरा एक विशाल तरकश था। वह घायल पशु उस घने जंगल में कहीं छिप गया था। तुम्हारे पिता बहुत ढूँढ़ने पर भी उसे नहीं ढूँढ पाए। | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पदातिर्बद्धनिस्त्रिंशस्ततायुधकलापवान्।
न चाससाद गहने मृगं नष्टं पिता तव॥ २५॥
अनुवाद
वह कमर में तलवार बाँधे पैदल चल रहा था। उसके पास बाणों से भरा एक विशाल तरकश था। वह घायल पशु उस घने जंगल में कहीं छिप गया था। तुम्हारे पिता बहुत ढूँढ़ने पर भी उसे नहीं ढूँढ पाए।
He was walking on foot with his sword tied to his waist. He had a huge quiver full of arrows. The wounded animal hid itself somewhere in that dense forest. Your father could not find it even after searching a lot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥