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mahabharat 1.49.21: उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनक! जब राजा जनमेजय ने उनसे इस प्रकार पूछा, तब उन मंत्रियों ने उन्हें सब वृत्तांत विस्तारपूर्वक कह ​​सुनाया, क्योंकि वे सभी राजा के प्रिय तथा उनके शुभचिंतक थे।   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.49.21 
सौतिरुवाच
एवं संचोदिता राज्ञा मन्त्रिणस्ते नराधिपम्।
ऊचु: सर्वे यथावृत्तं राज्ञ: प्रियहितैषिण:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनक! जब राजा जनमेजय ने उनसे इस प्रकार पूछा, तब उन मंत्रियों ने उन्हें सब वृत्तांत विस्तारपूर्वक कह ​​सुनाया, क्योंकि वे सभी राजा के प्रिय तथा उनके शुभचिंतक थे।
 
Ugrasravaji says - Shaunak! When King Janamejaya asked them in this manner, those ministers told him the entire story in full detail because all of them were dear to the king and were his well-wishers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)