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mahabharat 1.49.2: उग्रश्रवाजी बोले - हे ब्रह्मन्! सुनो, उस समय राजा ने मंत्रियों से जो कुछ पूछा था और उन्होंने परीक्षित की मृत्यु के विषय में मुझसे जो कुछ कहा था, वही मैं तुमसे कह रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.49.2 
सौतिरुवाच
शृणु ब्रह्मन् यथापृच्छन्मन्त्रिणो नृपतिस्तदा।
यथा चाख्यातवन्तस्ते निधनं तत् परीक्षित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - हे ब्रह्मन्! सुनो, उस समय राजा ने मंत्रियों से जो कुछ पूछा था और उन्होंने परीक्षित की मृत्यु के विषय में मुझसे जो कुछ कहा था, वही मैं तुमसे कह रहा हूँ।
 
Ugrashravaji said - O Brahman! Listen, I am telling you whatever the king asked the ministers at that time and whatever they told me regarding Parikshit's death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)