Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.19: जनमेजय ने पूछा—मंत्रियो! हमारे कुल में ऐसा कोई राजा नहीं हुआ जो अपनी प्रजा का प्रेमी न हो और सबका प्रिय न हो। विशेषकर हमारे महान पूर्वज पाण्डवों के उत्तम आचरण को देखकर, जो महापुरुषों के समान आचरण करने वाले थे, प्रायः सभी धर्मात्मा ही होंगे॥19॥ | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय उवाच
नास्मिन् कुले जातु बभूव राजा
यो न प्रजानां प्रियकृत् प्रियश्च।
विशेषत: प्रेक्ष्य पितामहानां
वृत्तं महद्वृत्तपरायणानाम्॥ १९॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा—मंत्रियो! हमारे कुल में ऐसा कोई राजा नहीं हुआ जो अपनी प्रजा का प्रेमी न हो और सबका प्रिय न हो। विशेषकर हमारे महान पूर्वज पाण्डवों के उत्तम आचरण को देखकर, जो महापुरुषों के समान आचरण करने वाले थे, प्रायः सभी धर्मात्मा ही होंगे॥19॥
Janamejaya asked—Ministers! There has never been a king in our clan who was not a lover of his subjects and loved by all. Especially, seeing the good conduct of our great ancestors, the Pandavas, who were devoted to the conduct of great men, almost all of them would be religious.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥