Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.17-18: तुम्हारे पिता ने साठ वर्ष की आयु तक इन समस्त प्रजा का पालन किया था। तत्पश्चात् हम सबको दुःख देकर विदेह-कैवल्य प्राप्त किया। हे पुरुषोत्तम! पिता के मरणोपरांत तुमने धर्मपूर्वक इस राज्य को स्वीकार किया है, जो हजारों वर्षों से कुरुकुल के अधीन है। बाल्यकाल में ही तुम्हारा राज्याभिषेक हुआ था। तब से तुम इस राज्य के समस्त प्राणियों का पालन करते हो। 17-18॥ | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम्हारे पिता ने साठ वर्ष की आयु तक इन समस्त प्रजा का पालन किया था। तत्पश्चात् हम सबको दुःख देकर विदेह-कैवल्य प्राप्त किया। हे पुरुषोत्तम! पिता के मरणोपरांत तुमने धर्मपूर्वक इस राज्य को स्वीकार किया है, जो हजारों वर्षों से कुरुकुल के अधीन है। बाल्यकाल में ही तुम्हारा राज्याभिषेक हुआ था। तब से तुम इस राज्य के समस्त प्राणियों का पालन करते हो। 17-18॥
Your father had taken care of all these subjects till the age of sixty years. Thereafter, by giving sorrow to all of us, he attained Videha-Kaivalya. Best man! After your father's death, you have religiously accepted this kingdom, which has been under the rule of Kurukula for thousands of years. You were coronated in your childhood itself. Since then you take care of all the living beings of this kingdom. 17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥