Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.49.16: उन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया था और अपने मन को वश में कर लिया था। वे बुद्धिमान थे और धर्म के मार्ग पर चलते थे। उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर - इन छह शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। उनकी बुद्धि विशाल थी। वे नीतिशास्त्र के विद्वानों में श्रेष्ठ थे॥16॥ | mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया था और अपने मन को वश में कर लिया था। वे बुद्धिमान थे और धर्म के मार्ग पर चलते थे। उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर - इन छह शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। उनकी बुद्धि विशाल थी। वे नीतिशास्त्र के विद्वानों में श्रेष्ठ थे॥16॥
He had conquered his senses and had kept his mind under control. He was intelligent and followed the path of Dharma. He had conquered the six enemies - lust, anger, greed, attachment, pride and envy. His intellect was vast. He was the best among the scholars of ethics.॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥