Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.49.13: राजा परीक्षित धनुर्वेद के कृपाचार्य के शिष्य थे। जनमेजय! आपके पिता भी भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय थे। 13॥   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.49.13 
धनुर्वेदे तु शिष्योऽभून्नृप: शारद्वतस्य स:।
गोविन्दस्य प्रियश्चासीत् पिता ते जनमेजय॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित धनुर्वेद के कृपाचार्य के शिष्य थे। जनमेजय! आपके पिता भी भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय थे। 13॥
 
King Parikshit was a disciple of Kripacharya in Dhanurveda. Janamejaya! Your father was also dear to Lord Krishna. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)