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mahabharat 1.49.12: दूसरे चन्द्रमा के समान उसका दर्शन समस्त प्राणियों के लिए सुखदायक और सुगम था। उसके राज्य में सभी लोग स्वस्थ और बलवान थे। वह धनवान, सत्यनिष्ठ और दृढ़ पराक्रमी था॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 49: राजा परीक्षित् के धर्ममय आचार तथा उत्तम गुणोंका वर्णन, राजाका शिकारके लिये जाना और उनके द्वारा शमीक मुनिका तिरस्कार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.49.12 
सुदर्श: सर्वभूतानामासीत् सोम इवापर:।
तुष्टपुष्टजन: श्रीमान् सत्यवाग् दृढविक्रम:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
दूसरे चन्द्रमा के समान उसका दर्शन समस्त प्राणियों के लिए सुखदायक और सुगम था। उसके राज्य में सभी लोग स्वस्थ और बलवान थे। वह धनवान, सत्यनिष्ठ और दृढ़ पराक्रमी था॥12॥
 
Like the second moon, his sight was pleasant and easy for all living beings. Everyone in his kingdom was healthy and strong. He was wealthy, truthful and steadfastly valiant.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)