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mahabharat 1.48.9: जब उसके भाई ने उससे यह पूछा, तो जरत्कारु ने अपने व्यथित भाई सर्पराज वासुकी को शांत करने का प्रयास किया और इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.48.9 
जरत्कारुस्ततो वाक्यमित्युक्ता प्रत्यभाषत।
आश्वासयन्ती संतप्तं वासुकिं पन्नगेश्वरम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब उसके भाई ने उससे यह पूछा, तो जरत्कारु ने अपने व्यथित भाई सर्पराज वासुकी को शांत करने का प्रयास किया और इस प्रकार कहा।
 
When her brother asked her this, Jaratkaru tried to pacify her distressed brother King of Snakes Vasuki and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)