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mahabharat 1.48.8: अतः हे प्रिय महिला, कृपया मुझे अपने पति के समस्त कार्यकलापों के बारे में बताइये और उस कांटे को निकाल दीजिये जो बहुत दिनों से मेरे हृदय में चुभ रहा है।   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.48.8 
आचक्ष्व भद्रे भर्तु: स्वं सर्वमेव विचेष्टितम्।
उद्धरस्व च शल्यं मे घोरं हृदि चिरस्थितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे प्रिय महिला, कृपया मुझे अपने पति के समस्त कार्यकलापों के बारे में बताइये और उस कांटे को निकाल दीजिये जो बहुत दिनों से मेरे हृदय में चुभ रहा है।
 
Therefore, dear lady, please tell me about all the activities of your husband and remove the thorn that has been piercing my heart for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)