Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.48.5-6: हे सुन्दरी! क्या तुम उस महामुनि से गर्भवती हुई हो? मैं नहीं चाहता कि उस महामुनि का तुम्हारे साथ विवाह निष्फल हो। मैं तुम्हारा भाई हूँ, अतः इस कार्य (पुत्र प्राप्ति) के विषय में तुमसे कुछ पूछना मेरे लिए उचित नहीं है, किन्तु कार्य के महत्व को देखते हुए मैंने तुम्हें इसके विषय में सब कुछ बताने के लिए प्रेरित किया है। ॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अप्यस्ति गर्भ: सुभगे तस्मात् ते मुनिसत्तमात्।
न चेच्छाम्यफलं तस्य दारकर्म मनीषिण:॥ ५॥
कार्यं च मम न न्याय्यं प्रष्टुं त्वां कार्यमीदृशम्।
किंतु कार्यगरीयस्त्वात् ततस्त्वाहमचूचुदम्॥ ६॥
अनुवाद
हे सुन्दरी! क्या तुम उस महामुनि से गर्भवती हुई हो? मैं नहीं चाहता कि उस महामुनि का तुम्हारे साथ विवाह निष्फल हो। मैं तुम्हारा भाई हूँ, अतः इस कार्य (पुत्र प्राप्ति) के विषय में तुमसे कुछ पूछना मेरे लिए उचित नहीं है, किन्तु कार्य के महत्व को देखते हुए मैंने तुम्हें इसके विषय में सब कुछ बताने के लिए प्रेरित किया है। ॥5-6॥
O beautiful lady! Have you conceived by that great sage? I do not want that wise sage's marriage with you to be fruitless. I am your brother, it is not proper for me to ask you anything about such a task (begetting a son), but considering the importance of the task, I have inspired you to tell me everything about it. ॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥