Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.48.3: वासुकि बोले - हे प्रिये! तुम सर्पों के महान कार्य और ऋषि से अपने विवाह के उद्देश्य को जानती हो। यदि तुम्हारे गर्भ से पुत्र उत्पन्न हो तो सर्पों का बहुत कल्याण होगा। | mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुकि बोले - हे प्रिये! तुम सर्पों के महान कार्य और ऋषि से अपने विवाह के उद्देश्य को जानती हो। यदि तुम्हारे गर्भ से पुत्र उत्पन्न हो तो सर्पों का बहुत कल्याण होगा।
Vasuki said - O dear! You know the great work of the snakes and the purpose of your marriage with the sage. If a son was born from your womb, it would be of great benefit to the snakes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥