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mahabharat 1.48.20: वह बालक अभी गर्भ में ही था, जब उसके पिता 'अस्ति' कहकर वन चले गए। इसलिए उसका नाम 'आस्तिक' संसार में प्रसिद्ध हुआ।   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.48.20 
अस्तीत्युक्त्वा गतो यस्मात् पिता गर्भस्थमेव तम्।
वनं तस्मादिदं तस्य नामास्तीकेति विश्रुतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह बालक अभी गर्भ में ही था, जब उसके पिता 'अस्ति' कहकर वन चले गए। इसलिए उसका नाम 'आस्तिक' संसार में प्रसिद्ध हुआ।
 
That child was still in the womb when his father left for the forest saying 'Asti'. Hence his name Astik became famous in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)