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mahabharat 1.48.19: वह बचपन से ही ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता हुआ बुद्धिमान और सद्गुणों से युक्त हो गया और लोगों में आस्तिक नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.48.19 
चीर्णव्रतो बाल एव बुद्धिसत्त्वगुणान्वित:।
नाम चास्याभवत् ख्यातं लोकेष्वास्तीक इत्युत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह बचपन से ही ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता हुआ बुद्धिमान और सद्गुणों से युक्त हो गया और लोगों में आस्तिक नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥19॥
 
He followed the vow of celibacy since childhood, became intelligent and endowed with good qualities. He became famous among the people by the name Aastik. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)