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mahabharat 1.48.18: वे नागराज के महल में पले-बढ़े। बड़े होने पर उन्होंने भृगु वंश में जन्मे ऋषि च्यवन से सभी छह भागों में वेदों का अध्ययन किया।   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.48.18 
ववृधे स तु तत्रैव नागराजनिवेशने।
वेदांश्चाधिजगे साङ्गान् भार्गवाच्च्यवनान्मुने:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे नागराज के महल में पले-बढ़े। बड़े होने पर उन्होंने भृगु वंश में जन्मे ऋषि च्यवन से सभी छह भागों में वेदों का अध्ययन किया।
 
He grew up in the palace of the King of Snakes. When he grew up, he studied the Vedas in all their six parts from the sage Chyavana, who was born in the Bhrigu clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)