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mahabharat 1.48.17: ब्रह्मन्! समय आने पर वासुकिकी की बहन ने एक दिव्य कुमार को जन्म दिया, जो देवताओं के बालक के समान तेजस्वी था। वह पिता और माता दोनों के भय का नाश करने वाला था। 17॥   |   mahabharat अध्याय 1.48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 48: वासुकि नागकी चिन्ता, बहिनद्वारा उसका निवारण तथा आस्तीकका जन्म एवं विद्याध्ययन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.48.17 
अथ काले तु सा ब्रह्मन् प्रजज्ञे भुजगस्वसा।
कुमारं देवगर्भाभं पितृमातृभयापहम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! समय आने पर वासुकिकी की बहन ने एक दिव्य कुमार को जन्म दिया, जो देवताओं के बालक के समान तेजस्वी था। वह पिता और माता दोनों के भय का नाश करने वाला था। 17॥
 
Brahman! Later, when the time came, Vasukiki's sister gave birth to a divine Kumar, who looked as bright as the child of the gods. He was the destroyer of the fears of both father and mother. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)