vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन
»
श्लोक 9
श्लोक
1.47.9
त्यजेयं विप्रिये च त्वां कृते वासं च ते गृहे।
एतद् गृहाण वचनं मया यत् समुदीरितम्॥ ९॥
अनुवाद
‘यदि मैं तुम्हारे साथ कुछ अप्रिय व्यवहार करूँ, तो मैं तुम्हें और तुम्हारे घर को छोड़ दूँगा। मैंने जो कुछ कहा है, इस वचन को दृढ़तापूर्वक निभाओ।’॥9॥
'If I do something unpleasant to you, I will leave you and your house. Whatever I have said, keep this promise firmly.'॥ 9॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd