Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.47.8: वहाँ महर्षि ने अपनी पत्नी के सामने यह शर्त रखी - 'तुम ऐसा कोई कार्य न करो जिससे मैं अप्रसन्न होऊँ। साथ ही, कभी अप्रिय वचन न बोलो॥8॥ | mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तत्र समयं चक्रे भार्यया सह सत्तम:।
विप्रियं मे न कर्तव्यं न च वाच्यं कदाचन॥ ८॥
अनुवाद
वहाँ महर्षि ने अपनी पत्नी के सामने यह शर्त रखी - 'तुम ऐसा कोई कार्य न करो जिससे मैं अप्रसन्न होऊँ। साथ ही, कभी अप्रिय वचन न बोलो॥8॥
There the great sage placed this condition before his wife - 'You must not do any such work which displeases me. Also, you must never speak unpleasant words.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥