Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.47.43: ऐसा कहकर जाने का निश्चय कर चुके पुण्यात्मा महामुनि जरत्कारु पुनः कठोर तप करने के लिए वन में चले गए ॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा जरत्कारुर्महानृषि:।
उग्राय तपसे भूयो जगाम कृतनिश्चय:॥ ४३॥
अनुवाद
ऐसा कहकर जाने का निश्चय कर चुके पुण्यात्मा महामुनि जरत्कारु पुनः कठोर तप करने के लिए वन में चले गए ॥ 43॥
Having said this, the virtuous great sage Jaratkaru, who had made up his mind to go, again went to the forest to perform rigorous penance. ॥ 43॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि जरत्कारुनिर्गमे सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें जरत्कारुका तपस्याके लिये निष्क्रमणविषयक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥