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श्लोक 1.47.42  |
अस्त्ययं सुभगे गर्भस्तव वैश्वानरोपम:।
ऋषि: परमधर्मात्मा वेदवेदाङ्गपारग:॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| शुभ हो! 'अयं अस्ति' - तुम्हारे उदर में गर्भ है। तुम्हारा यह अजन्मा बालक अग्नि के समान तेजस्वी, परम धार्मिक ऋषि और वेदों का पारंगत विद्वान होगा। 42॥ |
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| Good luck! ‘Ayam Asti’ – There is a womb in your stomach. This unborn child of yours will be as bright as fire, a highly religious sage and an expert scholar of the Vedas. 42॥ |
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