Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.47.41: यह सुनकर तपस्वी ॠषि ने अपनी पत्नी जरत्कारु से इस अवसर के लिए जो उचित और उपयुक्त था, वह कहा - ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.47.41 
एवमुक्तस्तु स मुनिर्भार्यां वचनमब्रवीत् ।
यद् युक्तमनुरूपं च जरत्कारुं तपोधन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर तपस्वी ॠषि ने अपनी पत्नी जरत्कारु से इस अवसर के लिए जो उचित और उपयुक्त था, वह कहा - ॥41॥
 
On hearing this the ascetic sage said to his wife Jaratkaru what was appropriate and suitable for the occasion - ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)