Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.47.31-32: 'मैंने तुमसे पहले ही ऐसी शर्त रखी थी। भद्रे! मैं यहाँ बहुत सुख से रह चुका हूँ। मेरे यहाँ से चले जाने पर अपने भाई से कहना - 'भगवान जरत्कारु चले गए हैं। शुभ! डरपोक! तुम भी मेरे जाने पर शोक न करो।'॥31-32॥ | mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समयो ह्येष मे पूर्वं त्वया सह मिथ: कृत:।
सुखमस्म्युषितो भद्रे ब्रूयास्त्वं भ्रातरं शुभे॥ ३१॥
इतो मयि गते भीरु गत: स भगवानिति।
त्वं चापि मयि निष्क्रान्ते न शोकं कर्तुमर्हसि॥ ३२॥
अनुवाद
'मैंने तुमसे पहले ही ऐसी शर्त रखी थी। भद्रे! मैं यहाँ बहुत सुख से रह चुका हूँ। मेरे यहाँ से चले जाने पर अपने भाई से कहना - 'भगवान जरत्कारु चले गए हैं। शुभ! डरपोक! तुम भी मेरे जाने पर शोक न करो।'॥31-32॥
‘I had already made such a condition with you. Bhadre! I have lived here very happily. After I leave from here, tell your brother – ‘Lord Jaratkaru has gone.’ Shubh! Timid! You should also not mourn after my departure.'॥ 31-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥