Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.47.3: ऋषि बोले - हे सर्पराज! मैं उसका साथ नहीं दूँगा, मेरी यह शर्त पक्की है। अब दूसरी शर्त यह है कि आपकी बहन कभी ऐसा काम न करे जो मुझे पसंद न हो। अगर वह कोई अप्रिय काम करेगी तो मैं उसे उसी क्षण त्याग दूँगा। | mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषिरुवाच
न भरिष्येऽहमेतां वै एष मे समय: कृत:।
अप्रियं च न कर्तव्यं कृते चैनां त्यजाम्यहम्॥ ३॥
अनुवाद
ऋषि बोले - हे सर्पराज! मैं उसका साथ नहीं दूँगा, मेरी यह शर्त पक्की है। अब दूसरी शर्त यह है कि आपकी बहन कभी ऐसा काम न करे जो मुझे पसंद न हो। अगर वह कोई अप्रिय काम करेगी तो मैं उसे उसी क्षण त्याग दूँगा।
The sage said - O King of Snakes! I will not support her, this condition of mine is fixed. Now the second condition is that your sister should never do such a thing which I do not like. If she does any unpleasant thing then I will abandon her at that very moment.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥