Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.47.23-24: नागकन्या की यह बात सुनकर महातपस्वी भगवान जरत्कारु जाग उठे। उस समय क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे। वे इस प्रकार बोले- 'नागिन! तूने मेरा ऐसा अपमान किया है।॥ 23-24॥ | mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्त: स भगवान् जरत्कारुर्महातपा:॥ २३॥
भार्यां प्रस्फुरमाणौष्ठ इदं वचनमब्रवीत्।
अवमान: प्रयुक्तोऽयं त्वया मम भुजङ्गमे॥ २४॥
अनुवाद
नागकन्या की यह बात सुनकर महातपस्वी भगवान जरत्कारु जाग उठे। उस समय क्रोध के कारण उनके होठ काँपने लगे। वे इस प्रकार बोले- 'नागिन! तूने मेरा ऐसा अपमान किया है।॥ 23-24॥
On hearing the serpent girl say this, the great ascetic Bhagwan Jaratkaru woke up. At that time his lips started trembling due to anger. He said thus- 'Serpent girl! You have insulted me like this.॥ 23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥