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mahabharat 1.47.13: वहाँ उसका गर्भ रह गया जो प्रज्वलित अग्नि के समान अत्यंत तेजस्वी और तपशक्ति से परिपूर्ण था। उसके शरीर की कांति अग्नि के समान थी ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 47: जरत्कारु मुनिका नागकन्याके साथ विवाह, नागकन्या जरत्कारुद्वारा पतिसेवा तथा पतिका उसे त्यागकर तपस्याके लिये गमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.47.13 
तत्र तस्या: समभवद् गर्भो ज्वलनसंनिभ:।
अतीवतेजसा युक्तो वैश्वानरसमद्युति:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उसका गर्भ रह गया जो प्रज्वलित अग्नि के समान अत्यंत तेजस्वी और तपशक्ति से परिपूर्ण था। उसके शरीर की कांति अग्नि के समान थी ॥13॥
 
There she was left with a womb which was very bright like a burning fire and was full of penance power. His body glow was like fire. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)