Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.46.5: जरत्कारु बोले - पितरों! मेरे हृदय में निरन्तर यही विचार घूम रहा था कि मैं इस शरीर को ऊर्ध्वरेता (अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला) बनकर परलोक (पुण्य के धाम) में ले जाऊँ॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जरत्कारु बोले - पितरों! मेरे हृदय में निरन्तर यही विचार घूम रहा था कि मैं इस शरीर को ऊर्ध्वरेता (अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला) बनकर परलोक (पुण्य के धाम) में ले जाऊँ॥5॥
Jaratkaru said – ancestors! This thought was constantly revolving in my heart that I should take this body to the next world (the abode of virtue) by becoming an Urdhvareta (foster of unbroken celibacy). 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥