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mahabharat 1.46.21: ब्रह्मन्! वहाँ नागेन्द्र वसु ने महात्मा जरत्कारु को भिक्षा के रूप में वह कन्या दी; परन्तु उन्होंने सहसा उसे स्वीकार नहीं किया॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.46.21 
तत्र तां भैक्ष्यवत् कन्यां प्रादात् तस्मै महात्मने।
नागेन्द्रो वासुकिर्ब्रह्मन् न स तां प्रत्यगृ ह् णत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! वहाँ नागेन्द्र वसु ने महात्मा जरत्कारु को भिक्षा के रूप में वह कन्या दी; परन्तु उन्होंने सहसा उसे स्वीकार नहीं किया॥21॥
 
Brahman! There Nagendra Vasu offered the girl as a beggar to Mahatma Jaratkaru; But he suddenly did not accept it. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)