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mahabharat 1.46.18: 'कोई मुझे मेरे ही नाम वाली एक कन्या दे दे, जो मुझे दान में दी जा सके और जिसका पालन-पोषण मेरा दायित्व न हो।'॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.46.18 
मम कन्या सना म् नी या भैक्ष्यवच्चोदिता भवेत्।
भरेयं चैव यां नाहं तां मे कन्यां प्रयच्छत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'कोई मुझे मेरे ही नाम वाली एक कन्या दे दे, जो मुझे दान में दी जा सके और जिसका पालन-पोषण मेरा दायित्व न हो।'॥18॥
 
'Someone should give me a girl who has the same name as mine, who can be given to me as alms and whose maintenance is not my responsibility.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)