Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.46.16: अतः विवाह हेतु मैं सम्पूर्ण पृथ्वी पर भ्रमण कर रहा हूँ और किसी कन्या से भिक्षा माँग रहा हूँ। यद्यपि मैं साधनहीन होने के कारण दरिद्र और दुःखी हूँ, फिर भी अपने पूर्वजों की आज्ञा से विवाह करने को तैयार हूँ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.46.16 
निवेशायाखिलां भूमिं कन्याभैक्ष्यं चरामि भो:।
दरिद्रो दु:खशीलश्च पितृभि: संनियोजित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः विवाह हेतु मैं सम्पूर्ण पृथ्वी पर भ्रमण कर रहा हूँ और किसी कन्या से भिक्षा माँग रहा हूँ। यद्यपि मैं साधनहीन होने के कारण दरिद्र और दुःखी हूँ, फिर भी अपने पूर्वजों की आज्ञा से विवाह करने को तैयार हूँ॥16॥
 
‘Therefore, for marriage, I am roaming the entire earth and begging for alms from a girl. Although I am poor and sad due to lack of facilities, still I am ready to get married by the order of my ancestors.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)