Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.46.11: उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! पितरों से इस प्रकार कहकर जरत्कारु मुनि पूर्ववत् पृथ्वी पर विचरण करने लगे। किन्तु उन्हें वृद्ध समझकर किसी ने भी कन्या नहीं दी, अतः उन्हें पत्नी प्राप्त न हुई। | mahabharat अध्याय 1.46: जरत्कारुका शर्तके साथ विवाहके लिये उद्यत होना और नागराज वासुकिका जरत्कारु नामकी कन्याको लेकर आना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौतिरुवाच
एवमुक्त्वा तु स पितॄंश्चचार पृथिवीं मुनि:।
न च स्म लभते भार्यां वृद्धोऽयमिति शौनक॥ ११॥
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! पितरों से इस प्रकार कहकर जरत्कारु मुनि पूर्ववत् पृथ्वी पर विचरण करने लगे। किन्तु उन्हें वृद्ध समझकर किसी ने भी कन्या नहीं दी, अतः उन्हें पत्नी प्राप्त न हुई।
Ugrasravaji says - Shaunakji! Having spoken to the ancestors in this manner, Jaratkaru Muni started roaming on the earth as before. But considering that he is old, no one gave a daughter to him, so he could not get a wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥